धारा 482 बी.एन.एस.एस./संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत
माननीय उच्च न्यायालय, ____________
क्रिमिनल मिस० रिट याचिका संख्या : ________ / 20___
अमुक बनाम राज्य एवं अन्य
याचिकाकर्ता :
श्री __________ पुत्र __________ निवासी __________ थाना __________ जनपद __________
विपक्षीगण :
- राज्य सरकार द्वारा प्रमुख सचिव, गृह विभाग, __________
- पुलिस अधीक्षक, जनपद __________
- थाना प्रभारी, थाना __________ जनपद __________
गिरफ्तारी से संरक्षण/दिशा-निर्देश हेतु प्रार्थना-पत्र
महोदय,
निवेदक विनम्रतापूर्वक निम्नलिखित निवेदन करता है :-
1.
यह कि याचिकाकर्ता एक सम्मानित नागरिक है तथा अपने परिवार का पालन-पोषण वैध साधनों से करता है। याचिकाकर्ता का किसी प्रकार का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
2.
यह कि विपक्षी संख्या-3 के थाना पर अभियोग संख्या ________ वर्ष ________ धारा ________ बी.एन.एस./आई.पी.सी. एवं अन्य धाराओं में पंजीकृत किया गया है।
3.
यह कि उक्त अभियोग पूर्णतः झूठा, मनगढ़ंत एवं द्वेषपूर्ण भावना से प्रेरित होकर दर्ज कराया गया है। याचिकाकर्ता को जानबूझकर फँसाने का प्रयास किया जा रहा है।
4.
यह कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया असत्य एवं निराधार हैं तथा याचिकाकर्ता का कथित घटना से कोई संबंध नहीं है।
5.
यह कि विवेचना अभी प्रचलित है, किन्तु पुलिस द्वारा याचिकाकर्ता को अनावश्यक रूप से गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे याचिकाकर्ता की स्वतंत्रता एवं प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
6.
यह कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न निर्णयों में यह प्रतिपादित किया गया है कि गिरफ्तारी एक अपवाद है तथा पुलिस अधिकारी को बिना पर्याप्त कारण गिरफ्तारी नहीं करनी चाहिए।
7.
यह कि याचिकाकर्ता विवेचना में सहयोग करने हेतु सदैव तैयार है तथा जब भी विवेचक अधिकारी द्वारा बुलाया जाएगा, उपस्थित होकर सहयोग करेगा।
8.
यह कि याचिकाकर्ता के फरार होने, साक्ष्य प्रभावित करने अथवा गवाहों को धमकाने की कोई संभावना नहीं है।
9.
यह कि पुलिस द्वारा यदि याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया जाता है, तो याचिकाकर्ता एवं उसके परिवार को अपूरणीय क्षति होगी जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी।
10.
यह कि याचिकाकर्ता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का अधिकारी है।
11.
यह कि माननीय न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप न किए जाने की स्थिति में विपक्षीगण याचिकाकर्ता को अवैध एवं मनमाने ढंग से गिरफ्तार कर सकते हैं।
12.
यह कि याचिकाकर्ता इस माननीय न्यायालय के समक्ष न्यायहित में यह याचिका प्रस्तुत कर रहा है।
आधार (GROUNDS)
क.
क्योंकि याचिकाकर्ता निर्दोष है तथा उसे दुर्भावनावश अभियोग में नामजद किया गया है।
ख.
क्योंकि प्राथमिकी में वर्णित आरोपों का कोई स्वतंत्र एवं विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
ग.
क्योंकि गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है तथा विवेचना बिना गिरफ्तारी के भी सम्पन्न की जा सकती है।
घ.
क्योंकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित दिशा-निर्देशों के अनुसार अनावश्यक गिरफ्तारी से बचना आवश्यक है।
ङ.
क्योंकि याचिकाकर्ता विवेचना में पूर्ण सहयोग करने को तैयार है।
च.
क्योंकि याचिकाकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है एवं उसके फरार होने की संभावना नहीं है।
छ.
क्योंकि पुलिस द्वारा की जाने वाली संभावित गिरफ्तारी संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगी।
ज.
क्योंकि न्यायहित में याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया जाना आवश्यक है।
प्रार्थना
अतः माननीय न्यायालय से विनम्र प्रार्थना है कि कृपया :
- विपक्षीगण को निर्देशित करने की कृपा करें कि याचिकाकर्ता को अभियोग संख्या ________ वर्ष ________ धारा ________ में बिना विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया अपनाए गिरफ्तार न किया जाए।
- यह आदेश पारित करने की कृपा करें कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई दमनात्मक कार्यवाही न की जाए।
- विवेचना के दौरान याचिकाकर्ता को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का लाभ प्रदान किया जाए।
- न्यायहित में कोई अन्य उपयुक्त आदेश/निर्देश पारित करने की कृपा करें।
स्थान : __________
दिनांक : __________
याचिकाकर्ता
(हस्ताक्षर)
अधिवक्ता
(एडवोकेट डी.एस.)
DISCLAIMER
यह ड्राफ्ट केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रत्येक वाद के तथ्य एवं परिस्थितियाँ भिन्न होती हैं, अतः न्यायालय में प्रस्तुत करने से पूर्व किसी योग्य अधिवक्ता से विधिक परामर्श अवश्य प्राप्त करें। लेखक किसी भी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष विधिक परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।