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एफ.आई.आर. निरस्तीकरण याचिका (FIR Quashing Petition)

1695889954945

(धारा 482 BNSS/पूर्व धारा 482 CrPC के अंतर्गत)

माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद
(लखनऊ/इलाहाबाद खण्डपीठ)

आपराधिक विविध याचिका संख्या — वर्ष ____

वाद

अमुक बनाम राज्य एवं अन्य


याचिकाकर्ता

  1. श्री ______ पुत्र ______ निवासी ______ थाना ______ जनपद ______

बनाम

विपक्षीगण

  1. राज्य सरकार, माध्यम से अपर मुख्य सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ।
  2. थाना प्रभारी, थाना ______ जनपद ______।
  3. प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने वाला/वादी ______।

धारा 482 BNSS के अंतर्गत प्राथमिकी निरस्तीकरण हेतु याचिका

महोदय,

याचिकाकर्ता निम्नलिखित निवेदन आदरपूर्वक प्रस्तुत करता है :—

1.

कि विपक्षी संख्या-3 द्वारा थाना ______ जनपद ______ में एफ.आई.आर. संख्या ______ वर्ष ______ धारा ______ IPC/BNSS के अंतर्गत पंजीकृत करायी गयी है। उक्त प्राथमिकी पूर्णतः असत्य, दुर्भावनापूर्ण एवं प्रताड़ित करने के उद्देश्य से दर्ज करायी गयी है।

2.

कि प्राथमिकी में लगाए गये आरोप प्रथम दृष्टया किसी भी संज्ञेय अपराध को स्थापित नहीं करते हैं तथा अभियोजन की संपूर्ण कार्यवाही विधि के दुरुपयोग के अतिरिक्त कुछ नहीं है।

3.

कि प्राथमिकी केवल व्यक्तिगत द्वेष एवं दुर्भावना के कारण दर्ज करायी गयी है जिससे याचिकाकर्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाई जा सके।

4.

कि कथित घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी उपलब्ध नहीं है तथा प्राथमिकी में वर्णित कथन पूर्णतः मनगढ़ंत एवं काल्पनिक हैं।

5.

कि प्राथमिकी में अंकित घटनाक्रम स्वाभाविक मानव आचरण के विपरीत है तथा उसमें गंभीर विरोधाभास एवं असंगतियाँ विद्यमान हैं।

6.

कि विपक्षी संख्या-3 ने तथ्यों को छिपाकर एवं झूठे आरोप लगाकर याचिकाकर्ता को आपराधिक मुकदमे में फँसाने का प्रयास किया है।

7.

कि याचिकाकर्ता निर्दोष व्यक्ति है तथा उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

8.

कि प्राथमिकी में उल्लिखित अपराध के आवश्यक तत्व विद्यमान नहीं हैं, अतः अभियोजन जारी रखना न्यायहित के विपरीत होगा।

9.

कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय State of Haryana vs Bhajan Lal में यह प्रतिपादित किया गया है कि यदि प्राथमिकी प्रथम दृष्टया अपराध स्थापित नहीं करती है अथवा दुर्भावना से प्रेरित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।

10.

कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध अभियोजन चलाना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा तथा इससे याचिकाकर्ता को अपूरणीय क्षति होगी।

11.

कि प्राथमिकी में वर्णित आरोप पूर्णतः सिविल प्रकृति के विवाद को आपराधिक रंग देने का प्रयास मात्र है।

12.

कि पुलिस द्वारा निष्पक्ष विवेचना किये बिना ही याचिकाकर्ता को उत्पीड़ित किया जा रहा है।

13.

कि प्राथमिकी दर्ज करने में अत्यधिक विलम्ब किया गया है जिसका कोई संतोषजनक कारण वर्णित नहीं है।

14.

कि यदि प्राथमिकी एवं समस्त कार्यवाही निरस्त नहीं की गयी तो याचिकाकर्ता को अनावश्यक मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी।

15.

कि न्यायहित में प्राथमिकी संख्या ______ दिनांक ______ थाना ______ जनपद ______ को निरस्त किया जाना आवश्यक है।


प्रार्थना

अतः माननीय न्यायालय से विनम्र प्रार्थना है कि कृपया—

  1. एफ.आई.आर. संख्या ______ वर्ष ______ धारा ______ थाना ______ जनपद ______ की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने की कृपा करें।
  2. याचिका के अंतिम निर्णय तक विवेचना/गिरफ्तारी पर स्थगनादेश प्रदान करने की कृपा करें।
  3. न्यायहित में कोई अन्य उपयुक्त आदेश/निर्देश पारित करने की कृपा करें।

स्थान : ______

दिनांक : ______

याचिकाकर्ता

(हस्ताक्षर)

अधिवक्ता

(हस्ताक्षर)


शपथपत्र

मैं, उपरोक्त याचिकाकर्ता, यह सत्यापित करता हूँ कि इस याचिका में वर्णित कथन मेरे व्यक्तिगत ज्ञान एवं विश्वास के अनुसार सत्य एवं सही हैं तथा कोई तथ्य नहीं छिपाया गया है।

दिनांक : ______
स्थान : ______

याचिकाकर्ता
(हस्ताक्षर)


Disclaimer

यह ड्राफ्ट केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी हेतु तैयार किया गया है। वास्तविक वाद के तथ्यों एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक संशोधन करना अनिवार्य है।

Author

Advocate D.S.

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