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“जुर्म स्वीकार (Guilty Plea) प्रार्थना-पत्र”

जुर्म स्वीकार प्रार्थना-पत्र

माननीय न्यायालय,
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, _________ (जनपद)

वाद संख्या: _________ / 20__
अपराध संख्या: _________ / 20__
धारा: _________
थाना: _________

वादी/राज्य बनाम
अभियुक्त: _________ पुत्र _________ निवासी _________


प्रार्थना-पत्र (जुर्म स्वीकार हेतु)

महोदय,

  1. कि उपरोक्त वाद माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, जिसमें प्रार्थी/अभियुक्त के विरुद्ध उल्लिखित धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है।
  2. कि प्रार्थी/अभियुक्त को मामले के समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों की पूर्ण जानकारी है तथा उसने अपने अधिवक्ता से विधिक परामर्श प्राप्त कर लिया है।
  3. कि प्रार्थी/अभियुक्त बिना किसी दबाव, प्रलोभन अथवा भय के, स्वेच्छा से अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों को स्वीकार करता है।
  4. कि प्रार्थी/अभियुक्त अपने कृत्य के लिए पश्चाताप व्यक्त करता है तथा भविष्य में इस प्रकार की त्रुटि न करने का आश्वासन देता है।
  5. कि प्रार्थी/अभियुक्त एक साधारण व्यक्ति है, जिसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है (यदि लागू हो), और वह न्यायालय की दया का पात्र है।
  6. कि प्रार्थी/अभियुक्त न्यायालय से विनम्र निवेदन करता है कि उसके द्वारा जुर्म स्वीकार करने के आधार पर उसे विधि अनुसार न्यूनतम दंड/दया का लाभ प्रदान किया जाए।
  7. कि यह प्रार्थना-पत्र न्याय के हित में प्रस्तुत किया जा रहा है।

प्रार्थना (Prayer)

अतः माननीय न्यायालय से विनम्र प्रार्थना है कि प्रार्थी/अभियुक्त द्वारा किए गए जुर्म स्वीकार को अभिलेख पर ग्रहण करते हुए, विधि अनुसार न्यूनतम दंड/राहत प्रदान करने की कृपा करें।


स्थान: _________

दिनांक: _________

प्रार्थी/अभियुक्त
(हस्ताक्षर)
नाम: _________

अधिवक्ता
(हस्ताक्षर)
नाम: _________


घोषणा / सत्यापन (Verification)

मैं, उपरोक्त प्रार्थी/अभियुक्त, यह सत्यापित करता/करती हूँ कि इस प्रार्थना-पत्र में वर्णित कथन मेरे व्यक्तिगत ज्ञान एवं विश्वास के अनुसार सत्य एवं सही हैं, और इसमें कुछ भी असत्य नहीं है।

दिनांक: _________
स्थान: _________

(हस्ताक्षर)
प्रार्थी/अभियुक्त


Disclaimer (अस्वीकरण)

यह ड्राफ्ट केवल सामान्य शैक्षणिक/सहायता उद्देश्य के लिए है। वास्तविक प्रकरण के तथ्यों, धाराओं एवं न्यायालय की आवश्यकताओं के अनुसार इसमें संशोधन आवश्यक हो सकता है। उपयोग से पूर्व अधिवक्ता से विधिक परामर्श अवश्य लें।


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