
परिचय
अक्सर लोगों को लगता है कि हर आपराधिक मामले में FIR ही दर्ज होती है, लेकिन ऐसा नहीं है।कई मामलों में पीड़ित व्यक्ति सीधे अदालत में शिकायत वाद (Complaint Case) दाखिल करता है।इस लेख में हम समझेंगे कि Complaint Case क्या होता है, कब दाखिल किया जाता है और इसकी पूरी प्रक्रिया क्या है, वह भी आसान हिंदी में।शिकायत वाद (Complaint Case) क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति किसी अपराध की शिकायत सीधे मजिस्ट्रेट की अदालत में करता है और पुलिस थाने में FIR दर्ज नहीं कराई जाती, तो उसे शिकायत वाद (Complaint Case) कहा जाता है।
📌 यह प्रक्रिया दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 200 के अंतर्गत होती है।Complaint Case कब दाखिल की जाती है?शिकायत वाद आमतौर पर इन परिस्थितियों में दाखिल की जाती है:जब पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर दे.
जब अपराध गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) होजब मामला निजी विवाद से जुड़ा होजब पीड़ित सीधे अदालत का सहारा लेना चाहे
Complaint Case किन मामलों में हो सकती है?
उदाहरण के लिए:मानहानि (Defamation)चेक बाउंस (138 NI Act)मारपीट के हल्के मामले धोखाधड़ी धमकी देना घरेलू विवाद (कुछ स्थितियों में)Complaint Case कौन दाखिल कर सकता है?पीड़ित व्यक्ति पीड़ित का अधिकृत प्रतिनिधि कोई भी व्यक्ति जिसे अपराध की जानकारी हो👉 शिकायतकर्ता को स्वयं अदालत में उपस्थित होना होता है।Complaint Case दाखिल करने की प्रक्रिया (Step-by-Step)
1️⃣ शिकायत पत्र तैयार करना शिकायतकर्ता अदालत में एक लिखित शिकायत पत्र दाखिल करता है, जिसमें:घटना का पूरा विवरणआरोपी का नाम व पता गवाहों की जानकारी संबंधित धाराएँ लिखी जाती हैं।
2️⃣ धारा 200 CrPC के तहत बयान मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता और गवाहों का शपथ पर बयान दर्ज करता है।
3️⃣ प्रारंभिक जांच (धारा 202 CrPC)यदि अदालत आवश्यक समझे, तो:स्वयं जांच कर सकती हैया पुलिस से जांच रिपोर्ट मंगा सकती है
4️⃣ समन जारी होनाअगर अदालत को प्रथम दृष्टया अपराध प्रतीत होता है, तो वह आरोपी को समन जारी करती है।
5️⃣ ट्रायल की प्रक्रियासमन जारी होने के बाद:आरोपी अदालत में उपस्थित होता हैसाक्ष्य प्रस्तुत होते हैं. बहस होती है.. अंत में फैसला सुनाया जाता है.
Complaint Case में गिरफ्तारी होती है?
👉 सीधे नहीं।पहले अदालत समन या वारंट जारी करती है।गंभीर मामलों में ही गिरफ्तारी होती है। Complaint Case वापस ली जा सकती है?
हाँ ✔️कुछ मामलों में अदालत की अनुमति से शिकायत वापस ली जा सकती है।महत्वपूर्ण कानूनी बातें झूठी शिकायत पर शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.
हर Complaint Case में पुलिस जांच जरूरी नहीं अदालत के विवेक की बड़ी भूमिका होती है.
📄 परिवाद वाद पत्र (Complaint Case Draft)
माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट महोदय,
न्यायालय ____________,
जनपद ____________।
परिवाद संख्या: ________ / 20__
वादकार (Complainant):
नाम: ____________
पिता का नाम: ____________
निवासी: ____________
बनाम
प्रतिवादीगण (Accused):
नाम: ____________ निवासी: ____________
नाम: ____________ निवासी: ____________
⚖️ धारा:
यह परिवाद दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 200 के अंतर्गत प्रस्तुत किया जा रहा है।
🧾 परिवाद पत्र (Complaint):
महोदय,
कि वादकार एक सम्मानित नागरिक है एवं अपने परिवार के साथ निवास करता है।
कि दिनांक //20__ को समय लगभग ___ बजे प्रतिवादीगण ने वादकार के साथ निम्नलिखित अवैध कृत्य किया—
👉 (यहाँ पूरी घटना विस्तार से लिखें — जैसे मारपीट, धोखाधड़ी, धमकी आदि)
कि प्रतिवादीगण ने वादकार के साथ गाली-गलौज, मारपीट एवं जान से मारने की धमकी दी।
कि उक्त कृत्य प्रतिवादीगण द्वारा जानबूझकर एवं दुर्भावना से किया गया, जो दंडनीय अपराध है।
कि घटना के समय वादकार के साथ निम्नलिखित गवाह उपस्थित थे—
(i) ____________
(ii) ____________
कि वादकार ने घटना के संबंध में थाना ________ में शिकायत की, परंतु कोई कार्यवाही नहीं की गई।
कि प्रतिवादीगण का कृत्य भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धाराएं 323, 504, 506 आदि के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
📌 मुख्य आधार (Grounds):
1. कि प्रतिवादीगण द्वारा किया गया कृत्य संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
2. कि प्रतिवादीगण ने वादकार के मौलिक अधिकारों का हनन किया है।
3. कि वादकार के पास घटना के पर्याप्त साक्ष्य एवं गवाह उपलब्ध हैं।
4. कि पुलिस द्वारा उचित कार्यवाही न करने के कारण वादकार को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
5. कि न्यायहित में प्रतिवादीगण के विरुद्ध समुचित कार्यवाही आवश्यक है।
🙏 प्रार्थना (Prayer):
अतः माननीय न्यायालय से निवेदन है कि—
प्रतिवादीगण के विरुद्ध उपयुक्त धाराओं में संज्ञान (Cognizance) लिया जाए।
वादकार के कथन एवं साक्ष्यों के आधार पर समन/वारंट जारी किया जाए।
प्रतिवादीगण को कानून के अनुसार दंडित किया जाए।
📑 साक्ष्य (Evidence):
प्रार्थी का शपथ पत्र
गवाहों के बयान
अन्य दस्तावेज (यदि कोई हो)
दिनांक: //20__
स्थान: ____________
वादकार (Complainant)
हस्ताक्षर: ____________
नाम: ____________
निष्कर्ष.
Complaint Case उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी उपाय है, जिन्हें पुलिस से राहत नहीं मिल पाती।यह प्रक्रिया न्याय पाने का एक वैध और प्रभावी तरीका है।
⚠️ अस्वीकरण .
यह लेख केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी सलाह न माना जाए। किसी विशेष कानूनी समस्या के लिए योग्य अधिवक्ता से परामर्श करें।
Author:)
Advocate (D.S. YADAV)
Experience: 7 Years
Practice Area: Criminal Law,Civil Law etc.