Posted in

निष्पादन प्रार्थना पत्र (Execution Application)

17738381624188009065212958097610

आदेश 21 नियम 10 CPC के अंतर्गत

माननीय न्यायालय सिविल जज (सीनियर डिवीजन), [जनपद ______]

निष्पादन वाद संख्या: _/20
मूल वाद संख्या: _/20


वादकारी / डिक्री धारक (Decree Holder):

[पूरा नाम, पिता का नाम, पता]

बनाम

प्रतिवादी / जजमेंट देनदार (Judgment Debtor):

[पूरा नाम, पिता का नाम, पता]


विषय:

डिक्री दिनांक //20__ के निष्पादन हेतु प्रार्थना पत्र


महोदय,

  1. यह कि वादकारी/प्रार्थी ने प्रतिवादी के विरुद्ध उपरोक्त मूल वाद संख्या _/20 माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया था, जो विधिवत सुनवाई के उपरांत निर्णय हेतु नियत हुआ।
  2. यह कि माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक //20__ को वाद का निस्तारण करते हुए वादकारी के पक्ष में एवं प्रतिवादी के विरुद्ध डिक्री पारित की गई।
  3. यह कि उक्त डिक्री के अनुसार प्रतिवादी को [निर्दिष्ट राशि रुपये ______ मात्र/कब्जा सुपुर्द करना/विशिष्ट कार्य करना] का आदेश पारित किया गया।
  4. यह कि डिक्री पारित होने के पश्चात वादकारी ने कई अवसरों पर प्रतिवादी से व्यक्तिगत रूप से तथा नोटिस के माध्यम से डिक्री का पालन करने का अनुरोध किया, किन्तु प्रतिवादी ने जानबूझकर एवं दुर्भावनापूर्ण तरीके से पालन नहीं किया।
  5. यह कि प्रतिवादी का आचरण स्पष्ट रूप से न्यायालय की अवमानना के समान है तथा वह डिक्री के अनुपालन से बचने हेतु टालमटोल कर रहा है।
  6. यह कि डिक्री पूर्णतः वैध, प्रभावी एवं प्रवर्तनीय (enforceable) है तथा उसकी वैधानिक अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है।
  7. यह कि वादकारी को डिक्री के अनुसार देय लाभ/राशि/कब्जा आज तक प्राप्त नहीं हुआ है, जिससे उसे आर्थिक एवं मानसिक क्षति हो रही है।
  8. यह कि प्रतिवादी के पास पर्याप्त चल एवं अचल संपत्तियाँ उपलब्ध हैं, जैसे कि [भूमि, मकान, बैंक खाता, वाहन आदि का विवरण], जिनसे डिक्री की पूर्ति की जा सकती है।
  9. यह कि न्यायालय की डिक्री का अनुपालन सुनिश्चित करना आवश्यक है, अन्यथा न्याय प्रणाली में विश्वास प्रभावित होगा।
  10. यह कि वादकारी को अन्य कोई प्रभावी एवं त्वरित उपाय उपलब्ध नहीं है, अतः माननीय न्यायालय की शरण में यह निष्पादन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जा रहा है।
  11. यह कि यह प्रार्थना पत्र विधि द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर प्रस्तुत किया जा रहा है, अतः पूर्णतः विचारणीय है।
  12. यह कि न्यायहित में यह आवश्यक है कि प्रतिवादी के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करते हुए डिक्री का विधिवत निष्पादन कराया जाए।

अतः प्रार्थना है कि—

  1. माननीय न्यायालय कृपया डिक्री दिनांक //20__ का निष्पादन कराने की कृपा करें।
  2. प्रतिवादी की चल एवं अचल संपत्तियों को कुर्क (attach) कर डिक्री की राशि की वसूली कराई जाए।
  3. आवश्यक होने पर प्रतिवादी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाए तथा सिविल कारावास में भेजा जाए।
  4. प्रतिवादी के बैंक खातों को सीज (freeze) कर डिक्री की राशि वसूल की जाए।
  5. यदि मामला कब्जा (possession) से संबंधित हो तो वादकारी को संपत्ति का वास्तविक कब्जा दिलाया जाए।
  6. वादकारी को डिक्री की राशि पर ब्याज एवं वाद व्यय (costs) भी प्रदान किए जाएं।
  7. न्यायालय जो भी अन्य आदेश न्यायहित एवं परिस्थितियों के अनुसार उचित एवं आवश्यक समझे, पारित करने की कृपा करें।

स्थान: _______

दिनांक: //20__

वादकारी / डिक्री धारक
[हस्ताक्षर]

अधिवक्ता
[नाम, नामांकन संख्या]


सत्यापन (Verification)

मैं, वादकारी/प्रार्थी, यह सत्यापित करता/करती हूँ कि उपरोक्त प्रार्थना पत्र की सामग्री मेरे व्यक्तिगत ज्ञान एवं अभिलेखों के आधार पर सत्य एवं सही है तथा इसमें कोई तथ्य असत्य या छिपाया नहीं गया है।

दिनांक: //20__
स्थान: _______

हस्ताक्षर
(वादकारी)


अस्वीकरण (Disclaimer)

यह ड्राफ्ट केवल सामान्य जानकारी एवं शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रत्येक वाद के तथ्य, दस्तावेज एवं परिस्थितियाँ भिन्न होती हैं, अतः न्यायालय में प्रस्तुत करने से पूर्व इसे संबंधित मामले के अनुसार संशोधित करना आवश्यक है। उपयोगकर्ता अपने अधिवक्ता की सलाह लेकर ही इसका प्रयोग करें। इस ड्राफ्ट के उपयोग से उत्पन्न किसी भी त्रुटि, हानि या विधिक परिणाम के लिए लेखक/प्रदाता उत्तरदायी नहीं होगा।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *