माननीय न्यायालय
माननीय __________ न्यायालय, जनपद __________
वाद संख्या : __________ / 20__
अपराध संख्या : __________ / 20__
धारा : __________
थाना : __________
वाद शीर्षक
राज्य बनाम __________
धारा 239/227 बी.एन.एस.एस. के अंतर्गत डिस्चार्ज प्रार्थना-पत्र
प्रार्थी/अभियुक्त :
नाम : __________
पिता का नाम : __________
निवासी : __________
विरुद्ध
राज्य
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि प्रार्थी उपरोक्त वाद में अभियुक्त है। विवेचना उपरांत पुलिस द्वारा आरोप पत्र प्रेषित किया गया है, किन्तु अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य एवं तथ्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि प्रार्थी के विरुद्ध कोई प्रथमदृष्टया अपराध सिद्ध नहीं होता है। अतः प्रार्थी निम्नलिखित आधारों पर डिस्चार्ज किये जाने योग्य है—
डिस्चार्ज के आधार (Grounds)
1.
कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत आरोप पूर्णतः असत्य, निराधार एवं मनगढ़ंत हैं तथा प्रार्थी को द्वेषवश अभियुक्त बनाया गया है।
2.
कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप सामान्य एवं अस्पष्ट प्रकृति के हैं तथा प्रार्थी के विरुद्ध किसी विशिष्ट कृत्य का उल्लेख नहीं किया गया है।
3.
कि विवेचना अधिकारी द्वारा निष्पक्ष विवेचना नहीं की गयी तथा उपलब्ध महत्वपूर्ण तथ्यों एवं साक्ष्यों की उपेक्षा की गयी है।
4.
कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आपस में विरोधाभासी हैं तथा उनसे प्रार्थी की संलिप्तता प्रमाणित नहीं होती है।
5.
कि कथित घटना के समय प्रार्थी घटनास्थल पर उपस्थित नहीं था तथा उसके विरुद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
6.
कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाहगण हितबद्ध एवं पक्षपाती हैं, जिनकी गवाही पर विश्वास किया जाना न्यायोचित नहीं होगा।
7.
कि प्रकरण में स्वतंत्र गवाहों का अभाव है तथा केवल शंकाओं के आधार पर प्रार्थी को अभियुक्त बनाया गया है।
8.
कि आरोप पत्र में वर्णित तथ्यों से भी अभियुक्त के विरुद्ध कथित अपराध के आवश्यक तत्व सिद्ध नहीं होते हैं।
9.
कि प्रार्थी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तथा वह सम्मानित व्यक्ति है।
10.
कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज एवं कथन प्रथमदृष्टया अपराध स्थापित करने हेतु पर्याप्त नहीं हैं।
11.
कि संपूर्ण अभियोजन कहानी कृत्रिम एवं अविश्वसनीय प्रतीत होती है, जिससे अभियोजन का मामला संदेहास्पद हो जाता है।
12.
कि प्रार्थी को इस वाद में केवल उत्पीड़न एवं मानसिक प्रताड़ना देने के उद्देश्य से फंसाया गया है।
13.
कि न्यायालय के समक्ष उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोप गठन किये जाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता है।
14.
कि यदि प्रार्थी के विरुद्ध विचारण चलाया जाता है तो यह न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
15.
कि माननीय उच्चतम न्यायालय एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा प्रतिपादित विधि सिद्धांतों के अनुसार, जहाँ प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता हो वहाँ अभियुक्त को डिस्चार्ज किया जाना न्यायोचित माना गया है।
प्रार्थना (Prayer)
अतः महोदय से विनम्र प्रार्थना है कि उपरोक्त तथ्यों एवं आधारों को दृष्टिगत रखते हुए प्रार्थी/अभियुक्त को उपरोक्त वाद से डिस्चार्ज किये जाने की कृपा की जाए, जिससे न्याय हित सुरक्षित हो।
दिनांक : __________
स्थान : __________
प्रार्थी/अभियुक्त
हस्ताक्षर : __________
अधिवक्ता
हस्ताक्षर : __________
Disclaimer
यह ड्राफ्ट केवल शैक्षिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी न्यायालय में प्रस्तुत करने से पूर्व प्रकरण के तथ्यों, लागू धाराओं एवं स्थानीय न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक संशोधन अवश्य कर लें।
Author
Advocate DS