
घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत जब किसी व्यक्ति (आमतौर पर पति/ससुराल पक्ष) के खिलाफ परिवाद (Complaint) दायर किया जाता है, तो प्रतिवादी (Respondent) को अदालत में उत्तर (Reply / Written Statement) दाखिल करना होता है।
यह पोस्ट आपको पूरा प्रोसेस + ड्राफ्ट + जरूरी टिप्स आसान और प्रोफेशनल तरीके से समझाएगी — ताकि आप इसे सीधे copy-paste करके उपयोग कर सकें।
1. परिवाद का उत्तर क्या होता है?
जब किसी महिला द्वारा घरेलू हिंसा का आरोप लगाकर कोर्ट में आवेदन दिया जाता है, तब कोर्ट प्रतिवादी को नोटिस जारी करती है।
इस नोटिस के जवाब में प्रतिवादी द्वारा जो लिखित जवाब दिया जाता है, उसे ही Reply / Written Statement कहते हैं।
इसमें आप:
आरोपों का खंडन (Denial)
अपनी सच्चाई (Facts)
साक्ष्य (Evidence)
कानूनी आधार (Legal Grounds)
प्रस्तुत करते हैं।
⏳ 2. उत्तर दाखिल करने का समय (Time Limit)
सामान्यतः कोर्ट द्वारा दिए गए नोटिस में समय दिया जाता है (अक्सर 15–30 दिन)।
यदि समय पर उत्तर नहीं दिया गया तो:
कोर्ट Ex-parte आदेश दे सकती है
आपकी बात सुने बिना फैसला हो सकता है
इसलिए समय पर Reply देना बेहद जरूरी है।
⚙️ 3. पूरा प्रोसेस – Step by Step
Step 1: नोटिस प्राप्त करें
कोर्ट या Protection Officer द्वारा नोटिस मिलेगा
उसमें अगली तारीख और आरोप लिखे होंगे
Step 2: वकील से सलाह लें
घरेलू हिंसा केस तकनीकी होता है, इसलिए अनुभवी वकील से सलाह लें
Step 3: आरोपों का विश्लेषण करें
कौन-कौन से आरोप लगाए गए हैं
कौन से सही / गलत हैं
किनका जवाब देना है
Step 4: दस्तावेज तैयार करें
जरूरी दस्तावेज:
शादी से जुड़े दस्तावेज
चैट / कॉल रिकॉर्ड
बैंक स्टेटमेंट
मेडिकल रिपोर्ट (यदि कोई हो)
गवाह (Witness)
Step 5: उत्तर (Reply) तैयार करें
हर आरोप का पैरा-वाइज (Para-wise) जवाब दें
Step 6: कोर्ट में दाखिल करें
Reply को शपथपत्र (Affidavit) के साथ जमा करें
कॉपी विपक्षी पक्ष को भी दें
茶 4. घरेलू हिंसा केस में उत्तर का ड्राफ्ट (Copy-Paste Ready)
⚖️ उत्तर (Reply) का फॉर्मेट
Copy code
माननीय न्यायालय (महिला न्यायालय / JMFC / CJM), ___________
वाद संख्या: ________ / 20____
प्रार्थिनी: (नाम)
विरुद्ध
प्रतिवादी: (नाम)
विषय: घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के अंतर्गत प्रस्तुत परिवाद का उत्तर
महोदय,
सविनय निवेदन है कि प्रतिवादी निम्नलिखित उत्तर प्रस्तुत करता है:
1. कि प्रार्थिनी द्वारा प्रस्तुत परिवाद पूर्णतः असत्य, निराधार एवं मनगढ़ंत है, जिसे प्रतिवादी सिरे से नकारता है।
2. कि प्रार्थिनी ने प्रतिवादी पर लगाए गए सभी आरोप झूठे एवं बेबुनियाद हैं। प्रतिवादी ने कभी भी प्रार्थिनी के साथ किसी प्रकार की शारीरिक, मानसिक या आर्थिक हिंसा नहीं की है।
3. कि प्रार्थिनी स्वयं बिना किसी उचित कारण के प्रतिवादी का घर छोड़कर चली गई है।
4. कि प्रतिवादी एक जिम्मेदार व्यक्ति है तथा प्रार्थिनी एवं परिवार के भरण-पोषण हेतु सदैव तत्पर रहा है।
5. कि प्रार्थिनी द्वारा यह परिवाद केवल प्रतिवादी को प्रताड़ित करने एवं धन वसूलने के उद्देश्य से दायर किया गया है।
6. कि प्रतिवादी के पास अपने बचाव में पर्याप्त साक्ष्य एवं गवाह मौजूद हैं, जिन्हें समय आने पर प्रस्तुत किया जाएगा।
अतः माननीय न्यायालय से निवेदन है कि प्रार्थिनी का परिवाद निरस्त किया जाए।
दिनांक: _______
स्थान: _______
प्रतिवादी
(हस्ताक्षर)
वकील
(नाम व हस्ताक्षर)
⚠️ 5. महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु (Important Points)
✔️ हमेशा Para-wise जवाब दें
✔️ हर आरोप का स्पष्ट खंडन करें
✔️ झूठे आरोप साबित करने के लिए साक्ष्य दें
✔️ Reply में भावनात्मक नहीं, कानूनी भाषा रखें
6. आम गलतियाँ (Common Mistakes)
❌ समय पर Reply न देना
❌ बिना वकील के गलत ड्राफ्ट देना
❌ सभी आरोपों का जवाब न देना
❌ झूठी जानकारी देना
7. प्रो टिप्स (Expert Tips)
⭐ Reply को मजबूत बनाने के लिए:
साक्ष्य जोड़ें
गवाह तैयार रखें
कोर्ट की तारीख मिस न करें
⭐ यदि मामला समझौते योग्य है:
Mediation का विकल्प अपनाएं
8. निष्कर्ष (Conclusion)
घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत परिवाद का उत्तर देना एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। सही समय पर, सही तरीके से और मजबूत साक्ष्यों के साथ Reply देना आपके केस को मजबूत बना सकता है।
⚠️ Disclaimer (महत्वपूर्ण सूचना)
यह जानकारी केवल सामान्य कानूनी जानकारी हेतु प्रदान की गई है। प्रत्येक केस के तथ्य अलग होते हैं, इसलिए किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले योग्य अधिवक्ता (Advocate) से परामर्श अवश्य लें। यह ड्राफ्ट केवल एक नमूना (Sample) है, जिसे अपने केस के अनुसार संशोधित करना आवश्यक है।
Author:)
Advocate (D.S. YADAV)
Experience: 7 Years
Practice Area: Criminal Law,Civil Law etc.